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  • CBSE का बड़ा फैसला: 9वीं-10वीं के सिलेबस में किया बदलाव, 2028 की बोर्ड परीक्षा में 5 मुख्य विषयों की अनिवार्यता

    नई दिल्ली : CBSE New Rules 2026: कक्षा 9वीं-10वीं का सिलेबस बदला, 2028 बोर्ड परीक्षा में 5 विषय अनिवार्य

    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम और परीक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। बोर्ड के इस नए निर्णय से शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 9वीं में पढ़ रहे विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है। इन विद्यार्थियों के 2027-28 में कक्षा 10वीं में पहुंचने पर भी संशोधित व्यवस्था लागू रहेगी।

    CBSE Class 9 and 10 syllabus changes and vocational education 2026 – AI

    बोर्ड ने कुछ नए प्रस्तावित विषयों को संबंधित बैच के पाठ्यक्रम से बाहर रखने का फैसला किया है। वहीं, व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य बनाए रखा गया है। इसके अलावा 2028 की कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में पांच मुख्य विषयों की परीक्षा अनिवार्य होगी।

    9वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए क्या बदला?

    CBSE के संशोधित निर्णय के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 9वीं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में कुछ बदलाव किए गए हैं।

    इस बैच के विद्यार्थियों को निम्नलिखित विषयों का अध्ययन नहीं करना होगा-

    1. Individuals in Society
    2. Computational Thinking (CT) और Artificial Intelligence (AI) के निर्धारित मॉड्यूल।

    इसके साथ ही जब यही विद्यार्थी शैक्षणिक सत्र 2027-28 में कक्षा 10वीं में पहुंचेंगे, तब उनके पाठ्यक्रम में Environmental Education भी शामिल नहीं होगी।

    बोर्ड ने यह बदलाव संबंधित पाठ्यक्रम को लागू करने की निर्धारित समय-सारणी के अनुरूप किया है।

    2028 की 10 वीं बोर्ड परीक्षा में पांच विषय होंगे अनिवार्य

    CBSE की नई व्यवस्था के तहत 2027-28 में कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को पांच मुख्य विषयों की परीक्षा देनी होगी। लेकिन विद्यार्थी यदि 22 स्किल विषयों में से कोई विषय चुनते हैं तो उसकी भी बोर्ड परीक्षा देनी होगी।

    इनमें पांच विषयों शामिल हैं:

    • पहली भाषा (Language R1)
    • दूसरी भाषा (Language R2)
    • गणित (Mathematics)
    • विज्ञान (Science)
    • सामाजिक विज्ञान (Social Science)

    इन पांच विषयों में विद्यार्थियों का प्रदर्शन बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहेगा।

    हालांकि, इसका अर्थ यह कदापि नहीं है कि विद्यार्थियों को पूरे साल केवल पांच विषय ही पढ़ने होंगे। बोर्ड की योजना के अनुसार विद्यार्थियों के लिए कुल नौ अनिवार्य शैक्षणिक क्षेत्र निर्धारित किए गए हैं।

    विद्यार्थियों को पढ़ने होंगे कुल 9 विषय

    नई व्यवस्था के अंतर्गत विद्यार्थियों की पढ़ाई में भाषा, विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान के साथ अन्य गतिविधियों और कौशल आधारित शिक्षा को भी स्थान दिया गया है।

    9 अनिवार्य शैक्षणिक क्षेत्रों में शामिल हैं:

    • Language R1
    • Language R2
    • Mathematics
    • Science
    • Social Science
    • Language R3
    • Art Education
    • Physical Education and Well-being
    • Vocational Education

    इनमें तीसरी भाषा, कला शिक्षा और शारीरिक शिक्षा जैसे क्षेत्रों का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर निर्धारित व्यवस्था के अनुसार किया जाएगा।

    इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल परीक्षा केंद्रित पढ़ाई तक सीमित रखने के बजाय अन्य जरूरी क्षमताओं के विकास का अवसर देना भी है।

    व्यावसायिक शिक्षा अब भी रहेगी अनिवार्य

    CBSE ने व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) को अनिवार्य शैक्षणिक क्षेत्र के रूप में जारी रखने का निर्णय लिया है।

    विद्यार्थियों को इसके लिए दो विकल्प मिलेंगे।

    पहला विकल्प: कौशल विकास (Kaushal Vikas)

    जो विद्यार्थी कौशल विकास विषय चुनेंगे, उनका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर आंतरिक परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा।

    इसमें कम से कम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबंधित स्कूल की ओर से प्रमाणपत्र दिया जाएगा। इसके लिए अलग से बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।

    दूसरा विकल्प: 22 स्किल विषयों में से एक का चयन

    विद्यार्थी बोर्ड की ओर से निर्धारित 22 कौशल आधारित विषयों में से भी किसी एक को चुन सकेंगे।

    22 स्किल विषयों में से किसी एक को चुनने वाले विद्यार्थियों को भी संबंधित विषय की बोर्ड परीक्षा देनी होगी। परीक्षा में सफल होने पर विषय के अंक और ग्रेड बोर्ड की मार्कशीट में दर्ज होंगे। इसके अलावा सफल विद्यार्थियों को NSQF प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा।

    कमजोर विद्यार्थियों को मिल सकता है अतिरिक्त फायदा

    नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू कौशल आधारित विषयों से जुड़ा है।

    अगर विद्यार्थी 22 स्किल विषयों में से कोई एक चुनता है और उसमें पास हो जाता है, पांच मुख्य विषयों में 33% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है लेकिन अगर इन पांच विषयों में गणित, विज्ञान या सामाजिक विज्ञान में से किसी एक में 33% अंक नहीं ला पाता, तो निर्धारित नियमों के अनुसार स्किल विषय उसके उस विषय की जगह ले सकता है।

    इससे संबंधित विद्यार्थी को परीक्षा परिणाम में राहत मिल सकती है।

    हालांकि, Kaushal Vikas चुनने पर यह सुविधा नहीं मिलेगी।

    क्या AI की पढ़ाई पूरी तरह बंद हो जाएगी?

    CBSE के फैसले को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में यह सवाल भी उठ सकता है कि क्या अब स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई पूरी तरह बंद हो जाएगी?

    ऐसा नहीं है।

    बोर्ड ने संबंधित बैच के लिए कक्षा 9वीं के निर्धारित Computational Thinking और AI मॉड्यूल को पाठ्यक्रम से बाहर किया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि CBSE ने AI से संबंधित सभी विषयों को समाप्त कर दिया है।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अभी भी बोर्ड के निर्धारित कौशल आधारित विषयों में शामिल है। विद्यार्थी उपलब्ध विकल्पों और स्कूल की व्यवस्था के अनुसार इसका चयन कर सकते हैं।

    इसलिए AI शिक्षा को पूरी तरह समाप्त किए जाने की बात कहना सही नहीं होगा।

    वर्तमान कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों पर नहीं पड़ेगा असर

    CBSE ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव मुख्य रूप से शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 9वीं में पढ़ रहे विद्यार्थियों पर लागू होगा, जो अगले सत्र में कक्षा 10वीं में पहुंचेंगे।

    वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 10वीं में पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए पहले से लागू पाठ्यक्रम और व्यवस्था जारी रहेगी।

    इसलिए मौजूदा कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों को इस नए निर्णय से भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है।

    विद्यार्थियों और अभिभावकों को क्या करना चाहिए?

    नए बदलावों को देखते हुए विद्यार्थियों और अभिभावकों को अपने स्कूल से विषय चयन और परीक्षा संबंधी जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।

    खासकर व्यावसायिक शिक्षा के दोनों विकल्पों के बीच अंतर समझना जरूरी है, क्योंकि कौशल विकास और 22 स्किल विषयों की परीक्षा तथा प्रमाणपत्र की व्यवस्था अलग-अलग है।

    स्कूलों को भी विद्यार्थियों और अभिभावकों तक संशोधित पाठ्यक्रम की जानकारी पहुंचाने के लिए कहा गया है।

    निष्कर्ष

    CBSE का यह निर्णय 2028 में कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है। नई व्यवस्था में पांच मुख्य विषयों की बोर्ड परीक्षा अनिवार्य होगी, जबकि अन्य शैक्षणिक क्षेत्रों में आंतरिक मूल्यांकन और कौशल आधारित शिक्षा को भी महत्व दिया जाएगा।

    विद्यार्थियों को अब विषयों के चयन के दौरान अपनी रुचि और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना होगा। बोर्ड के इस बदलाव से परीक्षा व्यवस्था के साथ-साथ व्यावसायिक शिक्षा को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

    महत्वपूर्ण जानकारी: यह बदलाव केवल 2026-27 के कक्षा 9वीं बैच और उसके 2027-28 के कक्षा 10वीं सत्र के लिए है।

    आधिकारिक आधार: CBSE Circular No. Acad-70/2026, दिनांक 29 अक्टूबर 2026।